Apr 16 2008
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अन्य पिछड़ा वर्ग को उच्च शैक्षिक संस्थाओं में 27 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने संबन्धी केन्द्रिय सरकार के निर्णय पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आखिरकार आ ही गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार के निर्णय को मान्य रखा है और खबर है कि अगले शैक्षिक सत्र से इस पर अमल...
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उस मकान में आये, उन्हें कुछ माह ही हुए थे। मकान बहुत सुन्दर था और आस-पड़ौस भी अच्छा था। अरूण और अदिति अपने दोनों बच्चों के साथ वहाँ काफी प्रसन्न थे। दिल्ली जैसे बड़े महानगर में रहने के पश्चात उनकी कम्पनी के कई लोग तो वहांँ आकर दुखी थे, पर...
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महादेवीजी ने छायावाद और रहस्यवाद में कोई तात्विक भेद नहीं माना है। उनके विचार में जब कवि ने प्रकृति की अनेकरूपता एवं परिवर्तनशीलता में एक ऐसा तारतम्य खोजने का प्रयास किया जिसका एक छोर असीम चेतन और दूसरा उसके ससीम हृदय में समाया हुआ था तब प्रकृति का एक-एक अंग...
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मनुष्य सांसारिक प्रपंचों में फंस कर इष्ट पूर्ति हेतु इतस्तत: भटकता फिरता है। वह कभी मंदिर में जाता है तो कभी मस्जिद में जाता है तो कभी गिरिजाघर में जाता है। इतना ही नहीं, वह किसी अन्य की प्रेरणा प्राप्त कर वन में देवताओं को ढूंढता है। यदि विचार किया...
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अध्यात्म के लोगों ने इस संसार को दो-तीन उपमाओं में उपमित किया है - स्वप्न, इंद्रजाल और मृगमरीचिका। संसार स्वप्न - जैसा है। संसार इंद्रजाल के समान है। संसार मृगमरीचिका के समान है। भारतीय साहित्य में स्वप्न की बहुत चर्चा प्राप्त है। भारतीय विद्या की अनेक शाखाओं में स्वप्न के...
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हिन्दी साहित्य में कहानी लेखन प्रारंभिक काल से ही होता रहा है। प्रारंभ में कहानी विशुध्द कल्पना या फेंटेसी के आधार पर लिखी गई। कहानियां जहां लोगों का मनोरंजन किए जाने का उद्द्ेश्य लेकर लिखी जाती रही है, वहीं समाज को सही दिशा देने के लिए किसी उपदेशात्मक तथ्य को...
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संपादक
घनश्यामप्रसाद सनाढय
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